Wednesday, July 20, 2016

भेट तुझी

साठवून डोळ्यात तुझीच आठवण,
तुझ्याच दिशेनं वाहतंय हे मन... 

                सहवासातले ते काही क्षण,
                वसले हृदयात दोहोंच्या पण ...

पुन्हा भेटण्याची ती ओढ नवी
आनंदाने एकमेकांस जी हसवी...

                नवी स्वप्नं नि नव्या आशा,
                उजळून येतील दाही दिशा...        

वेळोवेळी होई तुझाच भास,
वाटे लाभावा तुझाच सहवास...
             
               बघतेय प्रीतीत मी वाट तुझी,  
               वाटे क्षणांत व्हावी भेट तुझी... 
                          
-वेदांती
Bhet tujhi


Wednesday, July 13, 2016

College के दिन

COLLEGE में बढ़ती थी यारी,
बदलही जाती LIFE हमारी।
साथ रहते रहते दोस्तोके,
अलग ही चलती दुनिया सारी।

होती थी नई दोस्ती जहाँ,
और मिलते नए CRUSH
RECESS में ही तो हमारे,
बातों का होता RUSH

याद अभीभी आता है वो,
माँ का दिया हुआ TIFFIN
बात बातपर चिढ़ाना दोस्तो का,
और भूख लगने पर CANTEEN

खेलकुदमेही डूबें रहते,
मस्तीमें चलते हम।
संग दोस्तों के रहके,
भूल जाते बाकि सारे गम।

मिलकर सुलझाते कई उलझने ,
तब आई समझमे CARING
मिलकर करते शैतानीया भी ,
सिखी वहिसे SHARING

कही बातें होती प्यारभरी,
तो कही दुश्मनी जारी।
नहीं रही वो बातें अब तो,
ना ही रही वो यारी।

कुछ तो लगता है अधूरा,
अब तो यारो के बिन।
भूल ना पाएंगे दोस्तो, 
COLLEGE के वो सुहाने दिन।

-वेदांती

College के दिन
College के दिन